Environmental Education

Class :B.Ed lV Sem

Notes for students

Compiled by Asst..prof.Rashmi Gautam

Topic : Food Chain, Food web

खाद्य (भोजन) श्रृंखला (Food Chain)

जीवमण्डल (biosphere) या पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) के विभिन्न जीव (उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक) प्रत्यक्षतः (directly) या परोक्षतः (indirectly) भोजन के लिए एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। उत्पादक (producers) भोजन का निर्माण करते हैं तथा उत्पादकों को प्राथमिक उपभोक्ता या शाकाहारी जन्तु (Primary consumers or behaviours animals) और शाकाहारी जन्तुओं को विभिन्न श्रेणियों के माँसाहारी उपभोक्ता (carnivorous consumers) खाकर अपना पोषण करते हैं। इस प्रकार पारिस्थितिक तंत्र में भोज्य पदार्थों के स्थानान्तरण (translocation) के लिए उत्पादकों से उपभोक्ताओं की ओर एक श्रृंखला बनती है, जिसे खाद्य श्रृंखला (food chain) कहते हैं अर्थात् किसी पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक से उच्च उपभोक्ता तक खाद्य पदार्थों या खाद्य ऊर्जा के स्थानान्तरण के क्रमबद्ध प्रवाह पथ को खाद्य श्रृंखला (food chain) कहते हैं।

पारिस्थितिक तंत्र की खाद्य श्रृंखला (Food chain) जितनी बड़ी होती है. उस पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह के समय ऊर्जा का ह्रास उतना ही अधिक होता है। सामान्यतः एक पारिस्थितिक तंत्र में एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाएँ पाई जाती हैं। खाद्य श्रृंखला को समझने के लिए घास पारिस्थितिक तंत्र (grasslan ecosystem) की खाद्य श्रृंखला का उदाहरण ले सकते हैं। इसमें हरी घासें (Green grasses) उत्पादक (producers) होती है, जिन्हें टिड्डे (grasshopper) प्राथमिक उपभोक्ता (Primary consumer) के रूप में खाते हैं। टिड्डों को मेंढक, मेंढक को साँप एवं साँप को मोर खाकरे एक सीधी खाद्य श्रृंखला का निर्माण करते हैं। इसी प्रकार घास के मैदान के पारिस्थितिक तंत्र (grassland ecosystem) की दूसरी खाद्य श्रृंखला चूहा → साँप या बिल्ली बाज (या भेड़िया या कुत्ता) के रूप में हो सकती है।

खाद्य जाल (Food Web)

खाद्य श्रृंखला के अनुसार प्रत्येक पोषण स्तर, दूसरे पोषण स्तर (tropical level) से सीधा सम्बन्ध रखता है। प्राकृतिक स्थितियों में सामान्यतः केवल एक ही खाद्य श्रृंखला का कार्यरत् होना असम्भव है, अपितु कई खाद्य श्रृंखलाएँ, एक-दूसरे के साथ परस्पर सम्बन्ध दिखाती है। और अन्तर्ग्रसित (interlocking) नमूना (pattern) बना लेती है। इस प्रकार की अनेक खाद्य श्रृंखलाओं के एक समय कार्यरत होने के कारण खाद्य जाल (Food Web) बन जाता है। खाद्य श्रृंखला में पौधों को चूहे खाते हैं, परन्तु इसके अतिरिक्त पौधों को खरगोश भी खा सकते हैं। चूहों को साँप के अतिरिक्त दूसरे प्राणी तथा साँप को बाज

खाद्य जाल के वैकल्पिक पथ (alternative pathway) खाद्य श्रृंखला में नहीं पाए जाते। यह खाद्य जाल की स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। उदाहरण-यदि खरगोश की संख्या किसी क्षेत्र में कम हो जाती है, तो उल्लूओं (owls) के भूखे मर जाने की आशा की जाती है, परन्तु खरगोशों के कम होने से अधिक घास बची रहती है और चूहों की संख्या बढ़ने में मदद करती है। ऐसी अवस्था में उल्लू खरगोशों के स्थान पर चूहे खाने लगते हैं और बचे हुए खरगोशों की मूल मात्रा को पुनः बढ़ने का अवसर देते हैं। खाद्य जाल में जितने अधिक वैकल्पिक रास्ते हों, जीवधारियों के समुदाय की उतनी ही अधिक स्थिर होने की सम्भावनाएँ बढ़ती जाएँगी।

सन्तुलित पारिस्थितिक तंत्र, सभी जीवधारियों के जीवित रहने के लिए बहुत आवश्यक है'
उदाहरणार्थ, यदि प्राथमिक उपभोक्ता तंत्र में उपस्थि नहीं होते, तब उत्पादक, अधिक भीड़ (over crowding) तथा स्पर्धा (competition) के कारण

नष्ट हो जाते हैं। प्रत्येक पारिस्थितिक तंत्र सन्तुलन इस प्रकार, विशिष्ट प्राकृतिक रोध (स्पेशल नेचुरल चेक) के कारण बना रहता है।

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